हम  आत!क  की  दहषत  हमेषा  याद  करते  है!,पडोसी  के  नमूनो  से  तभी बे-मौत मरते है!

हम  आत!क  की  दहषत  हमेषा  याद  करते  है!,पडोसी  के  नमूनो  से  तभी बे-मौत मरते है!
इस  छब्बीस  नवम्बर की  कितनी याद आती है,य!हा हिजडे़ सियासत मे! हूकूमत ये बताती है
कुर्बानी  षहीदो!  की  रोती है  गुनाहो!  से, हम  घुट – घुट  के  मरते  है!  दहषत -गर्द आहो! से
हमे! तो ताज का सदमा अभी तक याद आता है,य!हा फिरका परस्ती भी अमन के गीत गाता है

हमे! इस  ताज से  कुछ  भी ना  लेना है ना देना है,हमारी  दृश्टि  मे! केवल षहीदो! की वो सैना है
जो  कुर्बान  होती  है, हमारी  जान  के  खातिर, य!हा  श्रद्वा!जलि  मे! भी टपकते है! सभी षातिर
दो  षूली  सियासत  से  कुछ  आत!कवादी को,नमन  हम  भी  करे!गे इस हूकूमत की मुनादी को
हो  श्रद्वा!जलि  ऐसी  पडोसी  तक  खबर  जाये,ये  आत!क  के  मुर्दे  कबर   मे!  खौ!प  को खाये!

कही! नक्सल,कही! जाति ,कही! आत!कवादी है! ,हम इस मौत की खेती के षदियो! से ही आदि है!
यहाॅं  तो  राजनेता  ही   मौतो! को  बुलाते है! ,मरघट  के  दरिन्दे!  क्यों! अमन   के  गीत गाते है!
यहाॅं हर कत्ल  के पीछे,सियासत खेल होता है,बष, भीडो!  के जमघट मे! निषाना  रेल  होता है
यहाॅं का न्याय बन्दूको! के साये मे!  ही पलता है ,इस नाटक के पीछे भी तो नेता  की सफलता है

लानत  है! मेरे  घर  का  ये  खाकर ही तो पलते  है! मेरे  घर के दिये  से आसियाने  रोज  जलते हैं
हमें दहषत दिखाकर के ये क्या परिणाम चाहते है!,यहाॅं आत!क मजहब की सुरक्षा से ही आते हैं
हर  मुजरिम  की  करते  है! हम दामाद सी खातिर ,तभी  तो राजनीति  मे!  दरिेन्दे  है! यहाॅं षातिर
जेलों म!े  पनाह मिलती  है  हर आतंकवादी को ,मुजरिम  के लिबासो! म!े तडफती,देख खादी को

सुनो  दिल्ली सुनो मुम्बई ये हम से  रोज कहता है,यहाॅं तो न्याय के मन्दिर मे! भी आत!क रहता है
यहाॅ! हर षख्स विस्फो!टो! के साये मे! ही जीता है,ये आलम है सभी घर का निकलना भी फजीता हेै
मुटठी  भर  मुगल  आये  ये  इतिहास  गाता  है ,यहाॅं स!स्कार   अ!ग्रेजी ,सभी कौमो को भाता है
यहाॅं  दुष्मन  नहीं   कोई , अपने   ही   बनाते है!,मेरे  घर मे!  ही रहकर  के  यवन के गीत गाते है!

ये पाकिस्तान का दरिया मेरे घर मे! क्यो! बहता है,ये फितरत है मेरे घर की,जो हरकत रोज सहता है!
हम  तो  हर  पडोसी  की  नवाजी  रोज  करते है! ,सियासत मे!  पले पागल  मेरे घर मे! क्यो!  मरते है!
पाकिस्तान से कह दो  कि हिजबुल कितने पालोगे ,कब तक मौत के मुॅ!ह सेे वतन अपना सॅ!भालोगे
अगर  हम  भी  करे!  प!गा  तू नक्षे  मे!  ना रह  पाये ,सरहद मे!  अगर  मूते! तो पाकिस्तान बह जाये

नये आत!क  की  षक्लो!  मे!  सत्याग्रह चलाओगे,अहि!सा के  उदाहरण से  क्या  हिन्दुस्तान खाओगे
अहि!सा  भी  तो  हि!सा  के  नये  रस्ते  बनाती  है,ये  कैसी  बेवकूफी है  जो  आजादी  से  आती है
यहाॅं फाॅंसी भी  रूकती  है  हूकूमत  की अपीलो! से,लफ!गे  बच  निकलते है! यहाॅं म!हगे! वकीलो! से
कुचलता  है!  सभी  आर्दष  हमारे   कारनामो!  से, यहाॅं आत!क   झडते!  है! ,नेता   के   पजामो!  से

सपोलो!   के   कपोलो! मे! कितना  दूध डालोगे, इन  आतंक की  नष्लो!  को  कितना  और  पालोगे
उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅं आत!क दिखता है,नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है
मुटठी  भर  दरिन्दो!  का  क्यों  इतिहास  गाते हो,महाभारत  को  पढकर भी  इतना खो!प  खाते हो
यहाॅं  स!हार  करने  को  खुद  अवतार  आता है ,ये  हि!सा  भी अहि!सा  है  ये  मुरलीधर   बताता है ।।
Custom Search

Do you have any contrary opinion to this post - Do you wish to get heard - You can now directly publish your opinion - or link to another article with a different view at our blogs. We will likely republish your opinion or blog piece at IndiaOpines with full credits