आम  आदमी – आम   आदमी    पूरे  भारत  मे! छायेगा – अन्ना दल  भी  हाथ  जोड़ कर अब इनके पीछे आयेगा

आओ  मेरे  साथ  लेट  लो,पर  कुछ गड-बड करना मत
मै!  तुमको   जूते   मारू!गी, ज्यादा  बड- बड  करना मत
साथ  रहू!गी  ,पर   सारे   इल्जाम   तुम्ही  पर  लगवाउ!गी
तुम  चकले   मे!  तबला  पीटो , मै!  केवल  गाना गाउ!गी
ढोल म!जीरो! तुम भी सुन लो,ज्यादा भड-भड़करना मत
आओ  मेरे  साथ  लेट  लो,पर  कुछ गड-बड करना मत

बलात्कार   के   सारे   चिटठे, मै!   चैराहो!   पर  खोलू!गी
तुम  सब  मौन  बने  रहना ,मै!  न!गी  होकर  सब बोलू!गी
बी0जे0पी0 और  का!ग्रेस  को भाण्ड बनाकर मै! छोडू!गी
राजनीति  के   परकोटो!   को  राण्ड  बना कर मै! छोडू!गी
मै! जो कुछ आरोप  लगाउ, हा!  करना  और मुकरना मत
आओ  मेरे  साथ  लेट  लो,पर  कुछ गड-बड करना मत

ये  आम  आदमी  की  हरकत  है,मौन हुये सब सह लेना
मै! जो चाहू!, वही  करू!गी, ये  बात  किसी  से मत कहना
मेरे   कारण   ही   अन्ना   को ,पूरा   भारत  जान  रहा है
देष का बच्चा-बच्चा,अन्ना अब  मुझको ही मान रहा है
जनता  से  जूते  मरवाये!गे, बस , तुम  थोडा  डरना मत
आओ  मेरे  साथ  लेट  लो,पर  कुछ गड-बड करना मत

लोक -सभा   की   तैयारी   मे!   मुख्यम!त्री   बन जाउ!गा
भारत   की   स!सद    मे!   आकर , मै!   उत्पात  मचाउ!गा
स!विधान  को  हटवा   करके , लोकपाल  से  देष चलेगा
राश्ट्रपति  की  क्या  जरूरत  है,हमसे  ही  ये राश्ट्र पलेगा
डेढ़ अरब  की  जनस!ख्या  से  मै!   कहता  हू!  मरना मत
आओ  मेरे  साथ  लेट  लो,पर  कुछ गड-बड करना मत

कवि-राज  विष्वास, केजरी, स!जय, सलमा सब आये!गे
हमे!  आ!कडे़  योगेन्दर,  गोपाल  राय   अब  दिखलाये!गे
आम  आदमी – आम   आदमी    पूरे  भारत  मे! छायेगा
अन्ना दल  भी  हाथ  जोड़ कर अब इनके पीछे आयेगा
हास्य-व्य!ग की  इस  कविता  मे! आग बहुत है डरना मत
  आओ मेरे साथ लेट लो,पर कुछ गड-बड करना मत!!
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