मै मरा मुहब्बत मै भूखा ,तू  मस्त मचलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  मूझको ही छलती चली गयी
मै सडक  छाप मजनूॅं बनकर तेरे पग चिह्न  निहार रहा
मै मरा मुहब्बत मै भूखा ,तू  मस्त मचलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  मूझको ही छलती चली गयी
मै सडक  छाप मजनूॅं बनकर तेरे पग चिह्न  निहार रहा
तू   पार हुयी बैतरणी से मै खडा – खडा उस  पार रहा
तू हवा मै उडती चिडिया है मै गिद्व हूॅं  चील परिन्दों सा
तू  काम  वाषना  षदियों से  मंे  हूॅं  दरवेश  दरिन्दों सा
मै बुझा हुआ चिरागों सा तू  लौ  सी जलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  मुझको ही छलती चली गयी
मैं  वीर, व्यंग  की  कविता  हॅूं ,तू  षोला  है सृगांरों की
मै  बुझी आग हॅूं चुल्हे की , तू  लपट  आग  अंगारों की
मै पेड हूॅं  नीम  हकीमों  का  तू  बेल  गिलोयी की उपर
मै   पैसेन्जर  का  डिब्बा  हॅूं  तू , एयर  कण्डीषन  सूपर
मै तार बाड हॅूं काॅंटों की तू गुल और चमन  बहारों   की
मै कारतूस  हॅूं  बुझा हुआ तू  खोज  नयी हथियारों  की
तू अपने नयन कटारों से ये  आग  उगलती  चली  गयी
मै करता गया भरोषा तू ——————-
मै राम  देव  हॅूं  योगा  का  तू राखी खुले स्वयंबर की
मै जून  जुलाई  की  गर्मी  तू  ठंड है भरे दिसम्बर की
मै पतझड  का मौसम हॅूं तू बसन्त ऋतु की हरियाली
मै  पूरातत्व  का  बरगद  हूॅं  तू बौर लदी अमुवा डाली
मै बेर हूॅं  झाड – झंकारों का तू लीची लाल बहारों की
मै टम- टम बुग्गी का घोडा  तू डोली लदी कहारों की
मै इन्तजार में  खडा  रहा तू मुझे मसलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  ——————
मै  बिहार  का  लालू   हॅूं   तू   माया   है  तू  ममता  है
मै प्यासा  अटल  बिहारी हॅूं तू राजनीति की क्षमता हैे
मै  मनमोहन  मौनी   बाबा तू  काॅंग्रेस   की   बोली है
मै  ब्रह्मचारी गोविन्दा  हूॅ   तू   उमा   बडी    ठिठोली है
मै कम्युनिश्ट तू सोसलिस्ट तू झण्डी लाल  दिखाती हेै
मै मोटा  चावल  सेले  का  तू  बासमती   बलखाती है
मै जिस मोड पे मिला तूझे तू राह बदलती  चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  ——————-
तू  दिल्ली  का राश्ट्र  खेल , मै अदना एक खिलाडी हॅंू
तू  है अब  तक  बची  हुयी, मैं फंसा हुआ कलमाडी हॅूं
तू राजनीति  मे  खादी  है,बर्बाद  हुयी अब  छक्कों से
मंेै नया नमाजी मुल्ला हंूॅं ंजो घिरा हूंॅ  चोर उचक्कों से
तू कामकला की माहिर है मंेै राम लला जग जाहिर हॅूं
तू आषा मंदिर,मस्जिद की मंे तोड-फोड में माहिर हॅूं
तू धर्म-कर्म के झगडे मंे भी फूलती फलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलती चली गयी
मंेै  राश्ट्र -भक्त हॅूं  भारत का तू पाकिस्तानी फतवा है
तू ! घुटी  हुयी  आतंकी  है  दुनिया  मंे  तेरा  रूतबा हैं
तू  मेरे घर की खुषीयों को भी कभी देख नही पाती है
बे-गुनाह भीड  मंे घुसकर के तू ही विस्फोट कराती है
घर  मंे  खाने  के  लाले  हैं  पर पंगा करना फितरत है
बष! तेरे  इन  कूकर्मो से  दुनिया  मंे तू  ही  नफरत है
बिना बात र्निदोशों  का सुख चैन निगलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलती चली गयी
मै ओबामा  तू  ओसामा , दुनिया  में  कहर  ढहाती है
मै प्रेम  प्रसारण  करता हूॅं  तू  हरदम  जहर  फैलाती है
मै विष्वामित्र  तपस्वी  हूॅं  तू  मेनका  बन के  आयी है
मै रोडा पथ पर पडा हुआ तू  षिखर की उॅंची खायी है
मैं कभी  ताज  था दुनिया  अब  तू  ही  राज चलाती है
तू नई कौम की रग रग में, महामारी सी घुस जाती है
मैं रोता  रहा  स्वयंबर को तू मस्त मचलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू ——————–
मै  लहर  हॅूं  बहती गंगा की तू  सागर  की सूनामी है
मै बाबा नंग लंगोटा हॅूं  तू लोभ ,मोह,मद , कामी है
मै योगी  बनना  चाहता हॅूं  तू नये  रोग  ले  आती  है
मै  धरा  में  नंगा सोता  हूॅं,तू  भ्रश्ट मुझे कर जाती है
मै जितना तुझसे बचता हॅूं,तू चिन्तन बनकर आती है
मैं  दुनिया छोड के जीता  हूॅं ,तू काम नये करवाती है
मैं हिम के  उपर  बैठ गया तू काम उबलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू  ——————-
तू  जल – तरंग  सारंगी  है, मै  ढोल,दमाउॅं  दासों का
तू  मन्द – मन्द  मुस्काती  है, मैं  तृश्कार उपहासों का
तू  वेणू  है सुर संगम  की  मैं  फटा  बाॅंस सा गायक हूॅं
तू काम  चलाती  दुनिया का,मैं कामचोर नालायक हॅूं
तू थिरकन हेै हर गीतों  की,मैं काॅंप रहा थरथर कामी
तू  उॅंची  कीमत  की   बोली , मैं  चैराहे  की  नीलामी
मैं गिरा सूरों से तालों से  तू गिरी संभलती  चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलती  चली गयी
मैंे ग्राम सभा की कटी लीज तू फारम  हाउस नेता क
तू लोकसभा और राज्य सभा मै र्रगमॅंच अभिनेता का
तू   रेखा ,  हेमा , श्री  देवी , मैंे   प्रेम  चैपडा आवारा
तू  सत्ता  और  सियासत  है  मंै  तेरी कूर्सि का प्यारा
तू संविधान  है  भारत  का  मंेै  संविधान  का  मारा हूॅं
तू ढीली  और  लचीली  है , मंेै  हरदम तुझ से हारा हॅूं
मै सजा सुनाता हॅूं जिनको  तू उनसे पलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलती चली गयी
मै भारत हॅूं ,महाभारत हॅूं , तू  हिन्दुस्तान  भिखारी है
मंेै भरा  हुआ भिखमंगों  सेे तू  आज  देष  मंे  भारी है
मंेै तो जनमत बनवाता हॅूं ,तू  लूट खसोट के खाती है
तू  वतन लूटने  वालों की सिरमोर बनी क्यों  जाती है
मंेै धोती  कुर्ता  पाजामा  इस लोक तंत्र का  जोकर हॅूं
तेरे कीचढ संे भॅंडा  हुआ बष लालकिले का  पोखर हॅूं
मंेै गौरव राश्ट्र तिरंगा हॅूं तू कफन  बदलती चली  गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलती चली गयी
तू स्विस बैंक  का  खाता  है मंेै  नौ के दस करवाता हॅूं
तू  काले  धन  की  माहिर है मंेैं  खुर्चन  तेरी  खाता हॅूं
बाबा  हैे  पीछे  पडा  हुआ  भारत मंे  तूझे  बुलवाने को
तेरी  ही  महिमा गाता  है  वो, राजनीति  मंे  आने को
ये अरबों का घोटाला  है कुछ  रोक  रहै  कुछ भोंक रहे
तू  मुद्दा  बनकर  आई है सब अपनी ताकत झोंक रहे
तू तोअजगर है ष्वाॅंसो से,ये राश्ट्र निगलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको  ही छलती चली गयी
क्यों भटका था जन्मों से में ये  बात समझ में आयी है
स्र्वग ,र्नक ,चैरासी  के गो- रस  में  छिपी   मलाई है
कहीं मोक्ष द्वार खुलवाती कहीं सीधा नरक दिखाती है
कहीं वषुन्धरा  है  हीरों की  कहीं कब्रिस्तान बनाती है
ये लता है सावन  भादों की अवलम्बन  वृक्षों की डाली
तू आलिंगन आधार  षिला तू जंगल  मंगल मतवाली
मैं बूढा होकर धरा  गिरा तू सती सी जलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही छलतीचली गयी
मै कांग्रेस तू  बी0 जे0 पी0 सत्ता  मे नजरे गढी
तू लालकिले  का सपना है,मै हू  पतझड से झडी हुयी
तू मोदी बनकर आयी है,मै लाल कृश्ण  चुपचाप खडा
तू छिपी हुयी आरएसएस.है,मै बी.जे.पी.नाराज धडा
तू  भीड  जुटाने  मे  माहिर,मै  धन  से भीड जुटाता हू
तू हिन्दू,मुस्लिम जोड  रही ,मै  राश्ट्र गीत ही गाता हू
तू डेढ अरब  की भीडो के जनमत मे घुलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको ही  छलती चली गयी
मंेै  छोटी  मोटी  तुकबन्दी,तू छॅंटी  छॅंटायी  राश्ट्र कवि
तू कवि श्रेश्ठ हैंे भारत की,हम हैं लोकल फरमान छवि
तुम  एक  गीत  ही  गाते  हो,ये  सारे दर्षक जान गये
तू राश्ट्र कवि जग  जाहिर हैं  भेैया ये हम भी मान गये
कविता तो मेरी फितरत है ,निःषुल्क मंच पर गाता हूॅं
मैंे अपनी  प्रतिभा  की  नौका,सूखे  मंे  नहीं चलाता हॅूं
तूमने  जो मुझको दी पीडा,वो आग उगलती चली गयी
मै करता गया भरोषा तू मूझको  ही छलती  चली गयी!!
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