कभी वतन की षान थे आज क्यो! अहसान है! दो चार की गिनती य!हा मजबूर हे!बेजान है! राश्ट्र के गौरव किसी को क्यो! समझ आते नही? कुछ बात है नई नष्ल को रणबा!कुरे भाते नंही शडयन्त्र की ये राजनीति राश्ट्र से क्यो!दूर है? पाष्चात्य की परछायी हर दिल में भरी भरपूर है आदमी भी नष्ल […]

कभी वतन की षान थे आज क्यो! अहसान है!
दो चार की गिनती य!हा मजबूर हे!बेजान है!
राश्ट्र के गौरव किसी को क्यो! समझ आते नही?
कुछ बात है नई नष्ल को रणबा!कुरे भाते नंही

शडयन्त्र की ये राजनीति राश्ट्र से क्यो!दूर है?
पाष्चात्य की परछायी हर दिल में भरी भरपूर है
आदमी भी नष्ल को अ!ग्रेजियत समझा रहा है
किस तरह से राश्ट्र नेता राश्ट्र को ही खा रहा है?

राश्ट्र के बलिदानियो!की याद अब फरियाद है
गौवंष के इस देष मे! भी यूरिया की खाद है
सम्प्रदायी जंग मे! स!स्कार अपने खो गये
राश्ट्र के जो पूत थे कैसे मजहब के हो गये?

परतन्त्र थे जब इस जमी पर ना कबीला कौम था
आधार था धरती बिछौना सर पे साया व्योम था
आज हम आजाद है! पर ना जमी आकाष है
हे, तिरंगे राजनीति पर तेरी क्यो! आष है

freedom fightrer षहीदो! की  तोहीन

हम मर गये, गुमनाम है!,आज अपने देष मे!
अब याद भी आते नही हम इस सियासी भेश मे!
हम नही चाहते हे!ैगौरव,मृत षवो!की षान का
प्रष्न उठता है य!हा,इस देष की पहचान का

अब राश्ट्र के मरघट पे तस्वीरे!बिछाना छोड दो
अब हमारी याद म!े झण्डा झुकाना छोड़ दो
स्वाभिमान तो बष षोभता है सरहदो! के वीर पर
मै! लिख रहा हूॅं गीत भारत मां तेरी तकदीर पर ।।

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